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THE YOUTHNEWS

श्री ननकाना साहब गुरद्वारे पर हमला पाकिस्तानी कट्टर इस्लामिक सोच को दर्शाता है ?

ये पत्थर का देस है पगले, 
कोई न तेरा होय ...

कविवर प्रदीप ने पिछली सदी में जब ये पंक्तियां लिखीं तो उस समय भारत के उस हिस्से जिसे अब पाकिस्तान के नाम से जाना जाता है, में रहने वाले हिंदू-सिखों को क्या मालूम था कि कुछ दशकों के बाद आंसू में कलम डुबो कर लिखी गई यही रचना उनकी नियती बन जाएगी। काबा में जा पत्थर चूमते-चूमते कुछ लोग खुद भी पत्थर हो गए, कभी इतनी ही शिदद्दत से इंसानों को भी प्यार किया होता तो वह न होता जो 3 जनवरी को पाकिस्तान स्थित श्री ननकाना साहिब में हुआ। वह ननकाना साहिब जहां आज से 550 साल पहले श्री गुरु नानक देव जी के रूप में एक ऐसी देवात्मा ने मानवदेह धारण की जिसने मानवता को 'सरबत्त दा भला' अर्थात समस्त चराचर के कल्याण का संदेश दिया। बिधि का विधान देखें आज उसी गुरु की जन्मस्थली पर उसी के ही नामलेवाओं को अपनी जानमाल तक के लाले पड़े दिखाई दे रहे हैं। जिहादी मनोरोग से ग्रस्त एक विभत्स खुंखार चेहरा चिंघाड़ रहा था, 'सिक्खो! मैं आ रेहा हां, तगड़े हो जाओ-ननकाने च कोई सिक्ख नईं रहैण देणा,' नानक के ननकाना का नाम गुलम-ए-मुस्तफा करने का सपना संजोए जनूनी भीड़ चंगेजी इस्लाम का परचम उठा उसके हौंसले बढ़ा रही थी और गुरुद्वारा साहिब में दुबके-सहमे खड़े थे नानक नामलेवा कमजोर व लाचार सिख। भयभीत सिखों और जनूनियों के बीच वाहेगुरु और गुरुद्वारा साहिब के मजबूत दरवाजे के रूप में दो ही दीवारें थीं। जब पूरी दुनिया गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती मना रही है और घटना के एक दिन पहले ही गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती मनाई गई तो ऐसे मौके पर ननकाना साहिब था जहां गुरुग्रंथ साहिब का पाठ नहीं हो रहा था, इतिहास में पहली बार कीर्तन को रद्द करना पड़ा। सिख भयाक्रांत थे, तो मौके से पूरी तरह नदारद दिखी इंसानियत, छुट्टी पर चली गई व्यवस्था और आंखों पर पट्टी बांध ली न्याय ने, अगर गुरुद्वारे का दरवाजा अपनी जिम्मेवारी ईमानदारी से न निभाता तो फिर से जीत जाती जकरिया खान की वह दुरात्मा जिसने अतीत में हमारे हृदयस्थल अमृतसर के श्री हरिमंदिर साहिब को नेस्तनाबूद करने का घोर पाप किया।
कोई पूछे तो क्या अपराध है इन बेसहारा हिंदू-सिखों का, यही न कि विभाजन के बाद इन्होंने अपने मूल स्थानों को नहीं छोड़ा। पत्थरों के देश पाकिस्तान को ही अपना वतन मान लिया ताकि गुरुघर की सेवा सम्भाल की जा सके। छोटे से अपराध की इतनी बड़ी सजा कि कोई भी आए और इनकी बहन-बेटी को उठा ले जाए। उसे डरा धमका कर इस्लाम कबूल करवा दे और पीडि़त परिवार को आवाज उठाने का अधिकार भी न मिले। यही तो हुआ ननकाना साहिब में, ग्रंथी सिंह की बेटी जगजीत कौर को हसन नाम के युवक ने पिछले साल अगस्त महीने में अगवा कर लिया और  इस्लाम कबूल करवा कर निकाह कर लिया। पीडि़त परिवार ने हर किसी के हाथ-पैर जोड़े परन्तु कोई मदद को आगे नहीं आया। सौभाग्य से उन दिनों करतारपुर साहिब गलियारे के खुलने की चर्चा जोरों पर थी। 'पत्थर के देस' का बादशाह इमरान खान भी किसी और वजह से ही सही परन्तु इसी काम में लगा था। जगजीत कौर के पिता ने करतारपुर साहिब गलियारे के उद्घाटन वाले दिन धरना देने की धमकी दी तो पत्थरों का देस हिल गया और जगजीत कौर के अपहृता को गिरफ्तार कर लिया और लड़की को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया। इस साल की शुरुआत में आरोपी के भाई को लोगों ने भड़काया कि- कैसे मुसलमान हो, सिखों की एक लड़की नहीं सम्भाली गई। इसी तैश में आकर जगजीत कौर को दोबारा घर से उठा लिया। जब सिख समाज ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया तो वहां के मुसलमानों ने इसे अपने खिलाफ मान लिया। इसी के प्रतिक्रम में 3 जनवरी को अपहरण काण्ड के आरोपी के भाई ने जुम्मे की नमाज के बाद मस्जिद से लौट रहे लोगों को भड़काया और उन्मादियों को साथ लेकर ननकाना साहिब के गुरुद्वारा साहिब पर जा चढ़ा।
पहले मोहम्मद हसन नाम के हमलावर ने सिखों को मारने-चीरने और गुरुद्वारे को मस्जिद में बदलने की धमकी दी और अब वो हमलावर अपने किये पर माफी मांगता दिखाई दे रहा है। पुलिस ने  उसे गिरफ्तार भी किया है लेकिन सवाल ये है कि क्या इतनी ही कार्रवाई काफी है? इस्लाम का अपमान करने वाले पर ईशनिंदा कानून लग जाता है, तो क्या मोहम्मद हसन पर और कोई सख्त कार्रवाई नहीं होगी?
सवाल इस हमलावर से ज्यादा उस भीड़ का है जो ननकाना साहब गुरुद्वारे को घेर कर खड़ी थी, जहां श्रद्धालु फंसे हुए थे। साथ ही सवाल पाकिस्तान सरकार के उस झूठ का भी है, जो यह मानने को तैयार ही नहीं है कि वहां सिखों के सबसे पवित्र स्थान को निशाना बनाया गया था। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे मुस्लिम समुदाय के दो गुटों की लड़ाई करार दे दिया। उसने तो ये तक कह दिया कि इस झगड़े का सिखों से कोई लेना-देना ही नहीं है। ये पाकिस्तान वही है जो एक ओर करतारपुर कॉरिडोर के बहाने खुद को दूसरे धर्मों के प्रति इज़्जत देने वाला बतलाता है, जबकि दूसरी ओर वह ननकाना साहब गुरुद्वारे पर हमले को लेकर झूठी कहानी गढऩे लगता है। खैर, पाकिस्तान की हकीकत तो गुरुद्वारे के बाहर जमा भीड़ ही बयां कर रही है, जो सिखों को मारने पर उतारू थी।
ननकाना साहिब पर हमले को लेकर चल रही खींचतान के बीच पेशावर में एक सिख युवक की अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी। रविंदर सिंह हाल ही में मलेशिया से पाकिस्तान शादी करने के लिए लौटा था। वह खैबर पख्तूनख्वां प्रांत के शांगला जिले का रहने वाला था और पेशावर में अपनी शादी के लिए ही खरीददारी करने गया हुआ था। जिस तरह का वाकया ननकाना साहब गुरुद्वारे पर हुआ है, यदि वैसा ही किसी मस्जिद को लेकर होता, कोई अन्य धर्मावलंबी किसी मस्जिद के बारे में ऐसी बात करता तो शायद पाकिस्तान का ईशनिंदा कानून अब तक उपयोग में लाया जा चुका होता। यदि पाकिस्तान सरकार में जरा भी शर्म है, तो उसे ननकाना साहब गुरुद्वारे पर हमला करने वाले शख्स पर अपने ईशनिंदा कानून के तहत कार्रवाई करनी चाहिए। क्योंकि जो अल्लाहताला मस्जिद में रहता है ईश्वर के नाम से मंदिर-गुरुद्वारे में भी वो ही निवास करता है। लेकिन फिर सवाल वही, क्या पत्थर के खुदा से ईमानदारी की उम्मीद की जा सकती है?

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